पिंजड़े से जैसे छूट के पंछी निकल गया ।
दिनमान सुख का ऐसे हमेशा को ढल गया।
वो कल भी थी मोहताज़ निवालों को आज भी,
सरकार बदलने से उसका क्या बदल गया ?
दिनमान सुख का ऐसे हमेशा को ढल गया।
वो कल भी थी मोहताज़ निवालों को आज भी,
सरकार बदलने से उसका क्या बदल गया ?
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