Tuesday, March 19, 2013

होली का रंग चढ़ा है

होली का रंग चढ़ा है जब से उमंग पर,
महुए ने मस्तियाँ लिखी हैं अंग अंग पर,
चाहत की मांग में भरा सिन्दूर प्यार ने,
थिरकी है फाग फिर से मन की मृदंग पर।।

Friday, March 15, 2013

बासंती रंगों से भर जाये ज़िन्दगी

महुए की गन्धों से,तितली के पंखों से,
जल की तरंगों से, सीपी  से, शंखों  से,
बहती  उमंगों  से,
बहती  उमंगों  से  भर जाये ज़िन्दगी।
बासंती रंगों  से  भर  जाये  ज़िन्दगी।।

पर्वत की छाया में झील के पलंग पर,
सोया  है जीवन का  राग ओढ़ चादर।
झरनों की कल-कल पे,
जल-कण की झल-मल पे बल खाए ज़िन्दगी।
मीत प्रीत परिमल से भर जाये ज़िन्दगी।।१।।

फागुन की गुन गुन और एकाकी ये क्षण ,
पायल की  रुन- झुन दे नेह का निमंत्रण ,
अरुनारे होठों से,
आँचल  की ओटों  से  घर आये  जिन्दगी।
मेंहदी- महावर  से  भर  जाये  ज़िन्दगी।।२।।

ऊषा  की किरनें ज्यों घुंघटा  उघार कर,
अम्बर पर नाच रहीं  सोलह श्रृंगार कर,
अंतस की शाखों पे,
सुधियों की पाँखों से भर  जाये जिन्दगी।
मोती बन आँखों से  झर  जाये जिन्दगी।।३।।  

Sunday, March 10, 2013

होली की धुन

गेसू  निशा के खुल गए, बेला महक उठा।
आँखों से पी के महुआ फागुन बहक उठा।
चाहत के गाल पर गुलाल प्यार ने मला,
होली की धुन पे मन का पंछी चहक उठा।।

डाo राजीव राज  

Saturday, March 2, 2013

कवि वो......


बारिश वो ज़िन्दगी जो ज़मीं पर उभार दे।
है  वो  हवा  जो  देह  की  थकन उतार  दे।
वादक न सिर्फ अपनी पीर बांसुरी का हो,
कवि वो जो ज़माने के दर्द को दुलार दे।।

रूप चांदनी

यौवन  की  देहरी  पे  अल्पना  संवर  गयी।
सपनों के दीप आँख के आँगन में धर गयी।
बेला सी खिल उठी सुकल्पनाओं की कली,
मन पे ये किसकी रूप चांदनी बिखर गयी।।

बारिश वो ज़िन्दगी जो ज़मीं पर उभार दे।
है  वो  हवा  जो  देह  की  थकन उतार  दे।
वादक न सिर्फ अपनी पीर बांसुरी का हो,
कवि वो जो ज़माने के दर्द को दुलार दे।।