Saturday, November 13, 2010

पूजनीय दादी

जहाँ परमसुख धाम है जहाँ न कोई शोक।
पूजनीय दादी गयीं हमें छोड़ सुरलोक ॥

Friday, November 5, 2010

वो ऐसे अपना ग़म छुपाता है.....

फटे होठों से मुस्कुराता है।

वो ऐसे अपना ग़म छुपाता है॥ १॥

सब हकीकत,नीयत छुपाते हैं ।

वो सिर्फ अपना ग़म छुपाता है॥ २॥

वो बस्ती में नया नया सा है ।

तभी औरो से कम छुपाता है॥३॥

ये नादानी-ए-इश्क देखो तो ।
वो मुट्ठी में जुगनू छुपाता है॥ ४॥

यकीनन ये ज़ख्मगर ही होगा।

पकड़ लो, ये मरहम छुपाता है॥ ५॥