फटे होठों से मुस्कुराता है।
वो ऐसे अपना ग़म छुपाता है॥ १॥
सब हकीकत,नीयत छुपाते हैं ।
वो सिर्फ अपना ग़म छुपाता है॥ २॥
वो बस्ती में नया नया सा है ।
तभी औरो से कम छुपाता है॥३॥
ये नादानी-ए-इश्क देखो तो ।
वो मुट्ठी में जुगनू छुपाता है॥ ४॥
यकीनन ये ज़ख्मगर ही होगा।
पकड़ लो, ये मरहम छुपाता है॥ ५॥
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