Friday, September 17, 2010

बिरवा की खातिर .......

बूँद- बूँद पर बहका बहका मन तो होगा ही ।


हां , सुहाना महलों का सावन तो होगा ही । ।


uska चूल्हा नहीं भींगता बारिश में।

भीगा - २ सावन मनभावन तो होगा ही । ।


शक की हद में रन्नो,सन्नो,मन्नो आती है ।


कोठी की मीना का तन पावन तो होगा ही । ।


जिस पर भी मजलूमों की आहों का गोटा हो ।


भरा तमाम दौलतों से दामन तो होगा ही । ।


शहर गए बेटे को कब अहसास हुआ ?


बिरवा की खातिर तरसा आँगन तो होगा ही । ।