vyanjana hoon nayee, vyakaran do mujhe. shabd hoon,satya ka aacharan do mujhe. "VEDNA" devki man ki kara me hai geet hoon krishn sa awtaran do mujhe.
Saturday, June 16, 2012
Tuesday, June 12, 2012
बेरोजगारी......?
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई
है किस काम की ये पढ़ाई लिखाई
फिरे दर-ब -दर,थक गए हैं क़दम पर
नहीं नौकरी, एक छोटी सी पाई
बड़ा आदमी लाल मेरा बनेगा,
गरीबी के तम में सवेरा बनेगा.
खुली रह गयीं थी ये सपना संजोये,
पिताजी की आँखें तो हम खूब रोये.
नियति का नियम सख्त बेबस खड़ा मैं
लिए साथ माँ की नज़र डबडबाई..
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई.....
पढाया हमें सुख की समिधा हवन कर
मेरी माँ ने हर अपनी इच्छा दमन कर
दिए दिल पे दुःख की अगन ने वो फलके
कि उनतीस सावन भी लगते हैं हलके
हमें रात-दिन पढके डिगरी मिली जो
बिना जैक रिश्वत के ना काम आई. .
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई.......
गया बालपन खेल में लड़ झगड़ कर
है ठहरा ये कैशौर्य भी जब न क्षण भर
जवानी बनी बामनी डग भला क्यों ?
है बेरोजगारी भरा मग भला क्यों ?
लिए पेट में आग आँखों में पानी,
भटकता विकल देश का कल है भाई .
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई......
है किस काम की ये पढ़ाई लिखाई
फिरे दर-ब -दर,थक गए हैं क़दम पर
नहीं नौकरी, एक छोटी सी पाई
बड़ा आदमी लाल मेरा बनेगा,
गरीबी के तम में सवेरा बनेगा.
खुली रह गयीं थी ये सपना संजोये,
पिताजी की आँखें तो हम खूब रोये.
नियति का नियम सख्त बेबस खड़ा मैं
लिए साथ माँ की नज़र डबडबाई..
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई.....
पढाया हमें सुख की समिधा हवन कर
मेरी माँ ने हर अपनी इच्छा दमन कर
दिए दिल पे दुःख की अगन ने वो फलके
कि उनतीस सावन भी लगते हैं हलके
हमें रात-दिन पढके डिगरी मिली जो
बिना जैक रिश्वत के ना काम आई. .
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई.......
गया बालपन खेल में लड़ झगड़ कर
है ठहरा ये कैशौर्य भी जब न क्षण भर
जवानी बनी बामनी डग भला क्यों ?
है बेरोजगारी भरा मग भला क्यों ?
लिए पेट में आग आँखों में पानी,
भटकता विकल देश का कल है भाई .
अरे, व्यर्थ में उम्र हमने गंवाई......
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