Friday, December 2, 2011

अपने प्रदेश को मत बांटो....

पहले मज़हब के नाम पर
ईसा,मूसा पर, राम पर 
अपने भारत के धड़े किये
भाई बैरी सम खड़े किये
अब आँगन में दीवार उठाने को विकास का नारा है
सत्ता की माया ने देखो फिर अपना जाल पसारा है
हम पूछ रहे हैं किसे खुशहाली दे पाया बंटवारा है ?
यूँ टुकड़े-टुकड़े मत काटो
अपने प्रदेश को मत बांटो

मंत्र के शोर में , स्वरमयी  भोर  में
छवि उभरने लगी नयन की कोर में
कल्पना रूप की सर्जना कर उठी.1
स्वांस की रागिनी अर्चना कर उठी 11

हो सुगन्धित भले किन्तु है व्यर्थ ही
निर्जने पर्वतों पर भटकता पवन
मैं अनायास ही काल के कुंड में
कर गया बिन गिने कितनी साँसे हवन

 मन की स्थिति नयी ,है परिस्थिति नयी
बोझ थी जिस पे हर सांस हाँ अब वही
ज़िन्दगी उम्र की याचना कर उठी 1
स्वांस की रागिनी अर्चना कर उठी 11.

मिल गए थे कि जिसमे सभी फूल ही
चाह के ,धूल वह आज कुमकुम हुई
आह जो तोड़कर स्वर का धागा गयी
थी ,वही आज ज्यों गीत मधुरिम हुई

जन्म से दूर थी, उम्र मजबूर थी
खोज में जिस के थक कर हुई चूर थी
पा के सम्मुख उसे वंदना कर उठी 1
स्वांस की रागिनी अर्चना कर उठी 11

आज अमवा तले कर रही चांदनी 
अनमने अपने प्रिय तम से मनुहार है
भाल पे,गाल पे पुष्प के झर रहा
चुम्बनों सा मृदुल ओस का प्यार है

नयन में छवि धवल, मुख पे घूंघट नवल
स्वप्न  की सुन्दरी , प्रीत की गंध मल
सत्य संसर्ग की कामना कर उठी 1
स्वांस की रागिनी अर्चना कर उठी 11   


Wednesday, October 26, 2011

दीप पर्व पर शुभकामना ......

जगमगा रहे हैं ज्यों दिवाली के दिए 
चूर- चूर दर्प अंधकार का किये 
आत्मशक्ति को बनाओ मन का सारथी 
जीवन के महाभारत में जीत के लिए

दीप पर्व पर शुभकामना ...... 

Thursday, October 13, 2011

ज़िम्मेदारी है समाज की जिम्मेदारी है ......

जो अपने  बाबुल के आँगन की किलकारी है 
राखी का संबल है जीवन जननि हमारी है 
असुरक्षित अस्तित्व उसी का संरक्षित करना 
ज़िम्मेदारी है समाज की जिम्मेदारी है 

विहंस उठेगा ह्रदय सुमन तितली सी डोलूँगी 
तुतलाते तुतलाते मुख  से बाबुल बोलूंगी    
मन  अधीर  होगा  जब  सूनी  देख  कलाई  को 
तिलक  भाल  पर कर राखी बांधूंगी  भाई  को
सबको सुख दूंगी मुझ पर विश्वास जताओ तो 
अभी अजन्मी हूँ मुझको दुनियां में लाओ तो 

मुझे मारने को उद्यत मेरी माँ प्यारी है    
ज़िम्मेदारी है समाज की जिम्मेदारी है 


Thursday, October 6, 2011

RAM HAMARE JEEVAN KE .......

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Saturday, October 1, 2011

AAJ PHIR BAPU TUMHAREE YAAD AAEE....

trast baroodee dhamakon se gagan,
cheekh aahen aur karunamay rudan,
yuddha bhashha ,jatiyon ke naam par,
raam par,nanak pe ya islaam par,
jinn jyon botal se hinsa ka nikal,
hai raha samvednaon ko nigal
ro rahee hai bhartee dekar manujta kee duhai ,
AAJ PHIR BAPU TUMHAREE YAAD AAEE

Wednesday, September 14, 2011

हिंदी .......

हर दिल जो गुनगुनाये वो नज़्म है हिंदी
नश्तर को फूल कर दे वो अजम है हिन्दी
इंसानियत का ज़ज्बा तह्जीबेज़िन्द्गी
जिसकी फिजाओं में बसे वो बज़्म है हिन्दी

Saturday, September 10, 2011

मौन जब से....

नग्नता यूँ बढी , आवरण हो गयी ।
संस्कृति का नया उद्धरण हो गयी ।
मौन जब से मेरे मन की संसद हुई ,
भ्रष्टता तंत्र का आचरण हो गयी ॥

ख्वाहिश......

लम्बी और अछोर हुई है।
ख्वाहिश आदमखोर हुई है॥

दोपहरी सा सन्नाटा है ।
कहने भर को भोर हुई है॥

उलझन मेरी बढते बढते ।
महानगर का शोर हुई है ॥

राज ज़िन्दगी बिना तुम्हारे।
कटी पतंग की डोर हुई है॥

Thursday, September 8, 2011

इरादों की ज़मीं हिलती है हिम्मत टूटने को है
सकीना तूफानी दरिया में फिर से डूबने को है
कुशासन देश को बेहाल करने पर आमादा है
दुशासन द्रौपदी की आन फिर से लूटने को है

Monday, September 5, 2011

SHIKSHAK DIWAS PAR APNE STUDENTS KE LIYE

mana ki hum nahee hain maa baap aapke,
jyada n chand roj se hain saath aapke,
hum aapkee khushee kaa sabab hon n hon magar,
ghum aapka bahega in aankhon k raste.


Tuesday, March 15, 2011

ज़िन्दगी जिंदा रहे ...

काश , हरदम, ये मिज़ाजे आशिकी जिंदा रहे ।
जब तलक जिंदा हूँ मुझमे ज़िंदगी जिंदा रहे॥
लेलो ,ये दिल का खिलौना हाथ में, फिर तोड़ दो।
ऐसा कुछ कर दो कि मेरी शायरी जिंदा रहे॥
संगेमरमर पर गिरा देता है अक्सर कांच वो।
हस के कहता है सितमगर मौशिकी जिंदा रहे॥
डाल से तोड़ो, सजाओ अचकनों पर खूब , गर।
फूल में वो डाल वाली ताजगी जिंदा रहे॥
मंदिरो मस्जिद के झगड़ो में  ulajhna hai फ़िज़ूल।
कोशिशें वो हों कि दिल में बंदगी जिंदा रहे॥
या खुदाया इल्तजा इंसानियत की है यही।
दर्द दिल में गैर का ताजिंदगी जिंदा रहे॥