पहले मज़हब के नाम पर
ईसा,मूसा पर, राम पर
अपने भारत के धड़े किये
भाई बैरी सम खड़े किये
अब आँगन में दीवार उठाने को विकास का नारा है
सत्ता की माया ने देखो फिर अपना जाल पसारा है
हम पूछ रहे हैं किसे खुशहाली दे पाया बंटवारा है ?
यूँ टुकड़े-टुकड़े मत काटो
अपने प्रदेश को मत बांटो
ईसा,मूसा पर, राम पर
अपने भारत के धड़े किये
भाई बैरी सम खड़े किये
अब आँगन में दीवार उठाने को विकास का नारा है
सत्ता की माया ने देखो फिर अपना जाल पसारा है
हम पूछ रहे हैं किसे खुशहाली दे पाया बंटवारा है ?
यूँ टुकड़े-टुकड़े मत काटो
अपने प्रदेश को मत बांटो