काश , हरदम, ये मिज़ाजे आशिकी जिंदा रहे ।
जब तलक जिंदा हूँ मुझमे ज़िंदगी जिंदा रहे॥
लेलो ,ये दिल का खिलौना हाथ में, फिर तोड़ दो।
ऐसा कुछ कर दो कि मेरी शायरी जिंदा रहे॥
संगेमरमर पर गिरा देता है अक्सर कांच वो।
हस के कहता है सितमगर मौशिकी जिंदा रहे॥
डाल से तोड़ो, सजाओ अचकनों पर खूब , गर।
फूल में वो डाल वाली ताजगी जिंदा रहे॥
मंदिरो मस्जिद के झगड़ो में ulajhna hai फ़िज़ूल।
कोशिशें वो हों कि दिल में बंदगी जिंदा रहे॥
या खुदाया इल्तजा इंसानियत की है यही।
दर्द दिल में गैर का ताजिंदगी जिंदा रहे॥
जब तलक जिंदा हूँ मुझमे ज़िंदगी जिंदा रहे॥
लेलो ,ये दिल का खिलौना हाथ में, फिर तोड़ दो।
ऐसा कुछ कर दो कि मेरी शायरी जिंदा रहे॥
संगेमरमर पर गिरा देता है अक्सर कांच वो।
हस के कहता है सितमगर मौशिकी जिंदा रहे॥
डाल से तोड़ो, सजाओ अचकनों पर खूब , गर।
फूल में वो डाल वाली ताजगी जिंदा रहे॥
मंदिरो मस्जिद के झगड़ो में ulajhna hai फ़िज़ूल।
कोशिशें वो हों कि दिल में बंदगी जिंदा रहे॥
या खुदाया इल्तजा इंसानियत की है यही।
दर्द दिल में गैर का ताजिंदगी जिंदा रहे॥
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