Friday, July 17, 2009

सच यह भी है

धारण कर खादी को जो शर्मिंदा करते हैं ,
ऐसे रंगे सियारों की सब निंदा करते हैं ,
पर सच यह भी है मित्रो इन बुतों बिजूकों को
हर चुनाव में हम तुम ही तो जिन्दा करते हैं

Wednesday, July 15, 2009

सुबह सलोनी

डाल डाल जीवन चले ,पात-पात संघर्ष
जो तजते धीरज नहीं,पाते हैं उत्कर्ष

सुबह सलोनी ने किए ,स्वर्णिम तीनों लोक
तम का तमस बुहारकर,दिया पुण्य आलोक

भंवरों का गुंजन मधुर,शीतल मंद समीर
ऊषा ने हर ली यथा , अंतर्मन की पीर

उनके माथे पर दिखे , चिंताजनित विभाव
लगभग बासठ की उमर, ड्यूटी आम चुनाव

खड़ा खेत की मेढ़ पर,निरखै पका अनाज
उमड़ें नीरद नयन में, नभ में गरजे गाज

अपनों ने जब दी व्यथा,अन्तर किया विदीर्ण
फूलों के पथ भी लगे, हमें कंटकाकीर्ण

Tuesday, July 14, 2009

पिता आत्मविश्वाश

धरती सम मैया मेरी , पिता यथा आकाश
मैया मेरी आत्मा , पिता आत्मविश्वाश

Friday, July 10, 2009

vedna aur geet

vyanjana hoon nayee, vyakaran do mujhe. shabd hoon,satya ka aacharan do mujhe. "VEDNA" devki man ki kara me hai geet hoon krishn sa awtaran do mujhe.

maa

Chehre par jhurri magar, damke divya swaroop.
swayam sulagkar surabhi de, maa pooja kee dhoop.

Jaise Kashi ki subah, Haridwar ki shaam.
man me pawnta bhare,maiya athon yaam.




Wednesday, July 8, 2009

APNA NAHEEN HAI WO.......

अपना नहीं है वो पराया भी नहीं hai.

nazmon में है wo बज्म में आया भी नहीं hai

तडपे हैं जिससे बिछड़ के मेरी ग़ज़ल के शेर

usne kabhee hothon pe sazaya bhee नहीं hai


पूछ उठी कविता कल हमसे कवी क्या काम तुम्हारा है

हम इतना ही कह पाए बस तनहाई के सघन तिमिर में

प्रहरों दिल का दीप जलाकर हमने तुम्हे पुकारा है


मन के आँगन में झरा जैसे हरसिंगार,

प्रिय ने जब मनुहार सुन खोले नैन किवार

pyasi dhartee kahe taras khao
tum ho badal to ab baras jaao

Monday, July 6, 2009

agyan k timir me hoon prakash chahiye,
sadmarg aur satya ka vishwash chahiye,
hum apni zindagi ko arthmay bana saken
GURUVAR k charan kamal ki suwash chahiye