जो अपने बाबुल के आँगन की किलकारी है
राखी का संबल है जीवन जननि हमारी है
असुरक्षित अस्तित्व उसी का संरक्षित करना
ज़िम्मेदारी है समाज की जिम्मेदारी है
विहंस उठेगा ह्रदय सुमन तितली सी डोलूँगी
तुतलाते तुतलाते मुख से बाबुल बोलूंगी
मन अधीर होगा जब सूनी देख कलाई को
तिलक भाल पर कर राखी बांधूंगी भाई को
सबको सुख दूंगी मुझ पर विश्वास जताओ तो
अभी अजन्मी हूँ मुझको दुनियां में लाओ तो
मुझे मारने को उद्यत मेरी माँ प्यारी है
ज़िम्मेदारी है समाज की जिम्मेदारी है
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