होली का रंग चढ़ा है जब से उमंग पर,
महुए ने मस्तियाँ लिखी हैं अंग अंग पर,
चाहत की मांग में भरा सिन्दूर प्यार ने,
थिरकी है फाग फिर से मन की मृदंग पर।।
महुए ने मस्तियाँ लिखी हैं अंग अंग पर,
चाहत की मांग में भरा सिन्दूर प्यार ने,
थिरकी है फाग फिर से मन की मृदंग पर।।
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