Sunday, March 10, 2013

होली की धुन

गेसू  निशा के खुल गए, बेला महक उठा।
आँखों से पी के महुआ फागुन बहक उठा।
चाहत के गाल पर गुलाल प्यार ने मला,
होली की धुन पे मन का पंछी चहक उठा।।

डाo राजीव राज  

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