गेसू निशा के खुल गए, बेला महक उठा।
आँखों से पी के महुआ फागुन बहक उठा।
चाहत के गाल पर गुलाल प्यार ने मला,
होली की धुन पे मन का पंछी चहक उठा।।
डाo राजीव राज
आँखों से पी के महुआ फागुन बहक उठा।
चाहत के गाल पर गुलाल प्यार ने मला,
होली की धुन पे मन का पंछी चहक उठा।।
डाo राजीव राज
No comments:
Post a Comment