Friday, March 15, 2013

बासंती रंगों से भर जाये ज़िन्दगी

महुए की गन्धों से,तितली के पंखों से,
जल की तरंगों से, सीपी  से, शंखों  से,
बहती  उमंगों  से,
बहती  उमंगों  से  भर जाये ज़िन्दगी।
बासंती रंगों  से  भर  जाये  ज़िन्दगी।।

पर्वत की छाया में झील के पलंग पर,
सोया  है जीवन का  राग ओढ़ चादर।
झरनों की कल-कल पे,
जल-कण की झल-मल पे बल खाए ज़िन्दगी।
मीत प्रीत परिमल से भर जाये ज़िन्दगी।।१।।

फागुन की गुन गुन और एकाकी ये क्षण ,
पायल की  रुन- झुन दे नेह का निमंत्रण ,
अरुनारे होठों से,
आँचल  की ओटों  से  घर आये  जिन्दगी।
मेंहदी- महावर  से  भर  जाये  ज़िन्दगी।।२।।

ऊषा  की किरनें ज्यों घुंघटा  उघार कर,
अम्बर पर नाच रहीं  सोलह श्रृंगार कर,
अंतस की शाखों पे,
सुधियों की पाँखों से भर  जाये जिन्दगी।
मोती बन आँखों से  झर  जाये जिन्दगी।।३।।  

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