पीड़ा धरा की देख न पाया विव्हल हुआ।
रोया तो बही यमुना गंगा में जल हुआ।
दुनियाँ में हिमालय सा बड़ा कौन हो सका
पाषाण हो के भी जो सृष्टी हित तरल हुआ।।
रोया तो बही यमुना गंगा में जल हुआ।
दुनियाँ में हिमालय सा बड़ा कौन हो सका
पाषाण हो के भी जो सृष्टी हित तरल हुआ।।
No comments:
Post a Comment