व्यंजना की धरा पे नभ सा व्याकरण होगा
शब्द की रूह तक पे सत्य का वरण होगा
वेदना देवकी है क़ैद मन की कारा में
गीत का आज कन्हैया सा अवतरण होगा
चेतना हूँ मैं सिर्फ़ मुझको जागरण दे दो
भावना हूँ मैं सुकोमल सी आवरण दे दो
आह संवेदना की आँख से मैं छलका हूँ
गीत हूँ अपने अधर पर मुझे शरण दे दो
तुम्हारी आस मेरी साँस की रवानी है
दिल तुम्हारी ही चाहतों की राजधानी है
आ भी जाओ कि सूखती है भोर की तुलसी
तुम्हारे बिन न महकती ये रात रानी है
थाम लो हसरतों का ज्वार मुझे छूलो ना
दिल को आ जायेगा करार मुझे छूलो ना
चेतना सी जो मेरी ज़िन्दगी की सोई है
जाग जायेगी बस एकबार मुझे छूलो ना
मैं अपने आंसुओं का अर्घ्य चढ़ाने आया
वेदना की जटा से गीत बहाने आया
भूख से जिनका दम निकल गया गरीबी में
मैं भगीरथ उन्ही को मुक्ति दिलाने आया
बंद कमरे में ही दुनियां समेट लेते हैं
कब कहाँ क्या-2 हो रहा है देख लेते हैं
गज़ब ये डिजिटली बन्दे हैं नयी पीड़ी के
दिमाग से ही दिल की जंग जीत लेते हैं
शब्द की रूह तक पे सत्य का वरण होगा
वेदना देवकी है क़ैद मन की कारा में
गीत का आज कन्हैया सा अवतरण होगा
चेतना हूँ मैं सिर्फ़ मुझको जागरण दे दो
भावना हूँ मैं सुकोमल सी आवरण दे दो
आह संवेदना की आँख से मैं छलका हूँ
गीत हूँ अपने अधर पर मुझे शरण दे दो
तुम्हारी आस मेरी साँस की रवानी है
दिल तुम्हारी ही चाहतों की राजधानी है
आ भी जाओ कि सूखती है भोर की तुलसी
तुम्हारे बिन न महकती ये रात रानी है
थाम लो हसरतों का ज्वार मुझे छूलो ना
दिल को आ जायेगा करार मुझे छूलो ना
चेतना सी जो मेरी ज़िन्दगी की सोई है
जाग जायेगी बस एकबार मुझे छूलो ना
मैं अपने आंसुओं का अर्घ्य चढ़ाने आया
वेदना की जटा से गीत बहाने आया
भूख से जिनका दम निकल गया गरीबी में
मैं भगीरथ उन्ही को मुक्ति दिलाने आया
बंद कमरे में ही दुनियां समेट लेते हैं
कब कहाँ क्या-2 हो रहा है देख लेते हैं
गज़ब ये डिजिटली बन्दे हैं नयी पीड़ी के
दिमाग से ही दिल की जंग जीत लेते हैं
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