Thursday, September 10, 2009

आदमी

हर आदमी में होते है दस बीस आदमी
जिसको भी देखना हो कई बार देखना
मैंदा की जीत हार तो किस्मत की बात है
टूटी है किसके हाथ में तलवार देखना

                                     -  निदा फाजली 

1 comment:

  1. चैन सुख शांति सब खो जाती है
    जब मेरे मोबाइल की घंटी घनघनाती है
    इसी दहसत में अक्सर जीता हूँ
    क्या पता कॉल किसकी आती है
    मेरी रिंग टोन में गाने हैं बहुत
    बेबसी मेरी छट पटाती है
    मुझे छोडो मेरे ज़माने में
    मेरी दादी मुझे बुलाती है.

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