माना कि हम नहीं हैं माँ बाप आपके
ज्यादा न चंद रोज़ से हैं साथ आपके
हम आपकी खुशी का सबब हों न हों मगर
गम आपका बहेगा इन आँखों के रास्ते।
अंजाम मेरा जो भी हो,आगाज़ आप हैं
एक बेजुबान गीत हैं हम साज़ आप
हैं हम हम बने तो सिर्फ और सिर्फ आपसे
कल आपका है और मेरा आज आप हैं
शिक्षक दिवस पर अपने शिष्यों के लिए डॉ राजीव राज
No comments:
Post a Comment