निकल आया अचानक ज्यों रुपहला चाँद बादल से।
कली ज्यों मुस्कराई है छुअन पर ओस के जल से।
उमस के बीच में सहसा लगी ठण्डी हवा बहने,
बजी है रागिनी निश्चित तुम्हारी शोख पायल से।।
डॉ राजीवराज
9012780006
कली ज्यों मुस्कराई है छुअन पर ओस के जल से।
उमस के बीच में सहसा लगी ठण्डी हवा बहने,
बजी है रागिनी निश्चित तुम्हारी शोख पायल से।।
डॉ राजीवराज
9012780006
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