Wednesday, October 9, 2013

बजी है रागिनी

निकल आया अचानक ज्यों रुपहला चाँद बादल से।
कली ज्यों मुस्कराई है छुअन पर ओस के जल से।
उमस के बीच में सहसा लगी ठण्डी हवा बहने, 
बजी है रागिनी निश्चित तुम्हारी शोख पायल से।।
डॉ राजीवराज 
9012780006

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