मोटी मोटी हो गयीं शिराएँ बैठ संसद में , इसी लिए रक्त की रवानी जाम हो गयी
इतना दिया है भोगने को भोग बेशुमार , पित्त पीर पाचन प्रणाली जाम हो गयी
पूछना जलद जन सेवकों से क्यों तुम्हारी सिर्फ भ्रस्टाचार के जवानी नाम हो गयी
कर के घोटाले जनता का धन लूटने की तेरे इन सपूतों की कहानी आम हो गयी
इतना दिया है भोगने को भोग बेशुमार , पित्त पीर पाचन प्रणाली जाम हो गयी
पूछना जलद जन सेवकों से क्यों तुम्हारी सिर्फ भ्रस्टाचार के जवानी नाम हो गयी
कर के घोटाले जनता का धन लूटने की तेरे इन सपूतों की कहानी आम हो गयी
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