Saturday, April 28, 2012

maa

दुक्ख  की रात  गयी और सुबह हुई निर्मल 
सुख की सरिता भी कर उठी किलोल कल कल कल
माँ जो पूजा की पीठिका पे दुआ को बैठी
थम गयी है मुसीबतों बलाओं की हलचल  

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